सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

मई, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मोटिवेशन VS आध्यात्मिकता

 पहली नज़र में तो ये दोनों एक जैसे ही लगते है पर इन दोनों शब्दो में ज़मीन आसमान का फर्क है।  हा, दोनों ही शब्द थोड़े बहुत भावनाओ में एक जैसे है पर फिर भी दोनों का अपना एक महत्व है।  पहला तो यही की मोटिवेशन आता है कुछ पाने के लिए या कुछ कर दिखाने के लिए जहाँ आध्यात्मिक विचारधारा कुछ पाने को नहीं अपितु जिसे छोड़ा नहीं जा सकता उससे जुड़ने की बात करती है।  हमने योग का नाम सुना ही होगा पर क्या आपको पता है योग का मतलब क्या है? योग का सही अनुवाद ही है जुड़ना पर किसे ? जिसको छोड़ा नहीं जा सकता यानि खुद से या ये भी कह सकते है की परमात्मा से क्यों की आध्यात्मिक विचारधारा का यही मानना है की हम परमात्मा से या खुद से अलग नहीं है पर कुछ पाने की दौड़ ही हमें उनसे अलग कर देती है तो दोनों के हेतु ही अलग अलग हो गए. मोटिवेशन हमेशा नहीं रह सकता अगर आप कुछ सुन के या कुछ देख, या पढ़ के मोटीवेट हो भी गए तो वो ज़्यादा समय तक नहीं टिक सकता।  हा, मोटिवेशन जल्दी आ जाता है कही पे कुछ पढ़ लिया या सुन लिया मन कुछ कर दिखाने को उत्सुक हो जाता है।  पर आध्यात्मिकता में इसे बिलकुल विरीत विपरीत स्थिति ह...

हमारी पसंद का असर

 एक  लड़के  ने कबीर सिंघ मूवी देखी उसे वो मूवी इतनी पसंद आयी की उसने वो मूवी १० बार देख ली नॉर्मल  लग रहा है नई ? पर  क्या तुम जानते हो की  उसकी ये पसंद का उसके मन पर क्या असर होगा? आगे चल कर वो लड़का दारू  पीना, अपने माँ बाप से गुस्से में बात करने को बड़ा कूल मानेगा पता है क्यों क्यों की  हमारा मन ऐसे ही काम करता है  जैसा की हमने ऊपर दिए गए उदहारण से देखा मन हमें जो भी पसंद आता है उस पर अपना दृष्टिकोण बना देता है, में ये नहीं कह रहा हु की कोई मूवी देखने से कोई उस प्रकार का वर्तन करने ही लगेगा पर उसका उस के मन पर गहरा असर पड़ता है जैसा की आज कल सब सुपरहीरो मूवी बहुत  देखते है उसमे से हर कोई छत पर से नहीं कूदता पर हर कोई अपने को सुपरहीरो  की तरह बनाना चाहता है  और हमारी पसंद हमें दुसरो से अलग बनाती है २ लोगो मेसे अगर एक को खेलना पसंद है और दूसरे को गुमना तो दोनों की विचारो में बहुत सा फर्क हम देख सकते है हमारी पसंद हमें ज़िंदगी  की बहुत सारी सीख  भी देती है अब हम देख सकते है की  हमारी पसंद का हमारे पर, हमारे व्यक्तित्व...