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The Spiritory- विभीषण का धर्म का रास्ता ( भाग १ )

  गर्मियों का मौसम है और आज शनिवार का दिन  यानि आधी छुट्टी , तो इस दिन विवेक,समीर और विनीत ने तय किया की आज समीर के खेत में जा के मस्त आम  खाएंगे। ११.३० का बेल बजते है तीनो चल पड़े समीर के खेत की तरफ। तीनों ने पहुँच  कर अपने थैले रख कर चल देते है आम खाने। विनीत को प्यास लगी थी तो वो पानी पेनी गया तभी समीर विवेक से कहता है  समीर- ''इस पेड़ की उस टहनी को देखो दिख तो मजबूत रही है ! पर हे नहीं '' (विवेक देख के हामी भरता है। ) समीर आगे कहता है'' क्यों न हम विनीत को इस टहनी पर उक्शा के चढ़ाये। (एक शरारती हास्य ) समीर के ये कहने के बाद विवेक टहनी के निचे वाली जगह देख के कुछ बोलने ही वाला था की विनीत आ जाता है।  समीर -'' विनीत ये देखो में ये दो आम पेड़ से उतार के लाया और विवेक ये दो आम उतार के लाया अब तुम्हारी बारी है वो एक वहां मस्त ऍम देख रहे हो बस वो उतार लो फिर हम मिलके खायेंगे। '' विनीत ठीक है का इशारा कर के पेड़ पे चढ़ता है।  विवेक -'' विनीत  उस टहनी पर मत जाओ वो काफी नरम है और समीर  में जनता हु तुम मजे के लिए ये कर रहे हो पर वो टहनी बहुत ऊपर है ...

भगवान ने सृष्टि की रचना कैसे की ? (HOW WORLD IS CREATED)

  सृष्टि की रचाना  कैसे हुई इस पर कई सारी धारणाए है। हमने पाश्चात्य विचारधारा के अनुसार बिग बैंग धारणा के बारे में सुना है अलग अलग पंथ  की अलग अलग धारणाए है ज़्यादातर पंथ यही मानते है की ईश्वर ने रचना की और विज्ञान इसके बिलकुल विपरीत जाता है खैर , दोनों ही विचारधारा की अपनी अपनी सीमाएं है विज्ञान हो सकता है ये साबित करके दिखाए की सृष्टि की रचना ख़ुद हुई पर इसका जवाब  विज्ञान के पास भी नहीं है की मानव में चेतनता किसने भरी या क्यों सृष्टि में मरण और जीवन का अस्तित्व है। पर भारतीय विचारकों ने ये जवाब बिलकुल तार्किक रूप से जाना और समझाया है।  तो हमारे ऋषि थे बहुत जज्ञासु कोई प्रश्न उत्पन्न  होता तो उसका जवाब  बिना नहीं रहते उसमे ये प्रश्न हुआ की ये सृष्टि की रचना कैसे हुई ? ये मान लेना की ऐसे ही सूर्य, अपनी जगह चंद्र ,अपनी जगह स्थित हो गए तो ये बात बहुत विचित्र सी है इसमें कोई संदेह है की कोई तत्त्व है जिसने इस सृष्टि को जन्म दिया है , जैसे हमें कोई जन्म देने वाला है वैसे ही इस सृष्टि को भी कोई न कोई जन्म देने वाला होगा ही इसी सी कई विचारधारए या विकल्प खोज न...

आधुनिक शिक्षण व्यवस्था और गुरुकुल व्यवस्था में क्या अंतर है ?

एक समय था जब भारत सोने की चिड़िया कहा जाता था। सब लोग कार्य में भी कुशल और बुद्धि में भी कुशल थे शायद भारत ही एक ऐसा देश था जहा पे कार्य और बुद्धि दोनों की  कुशलता का समन्वय होता था क्यों की आमतौर पर देखा जाता है जहाँ पर कार्य की कुशलता हो वह बुद्धि की कुशलता नहीं होती और जहा बुद्धि की कुशलता हो वहा कार्य में कुशलता नहीं होती। भारत में इस का समन्वय क्यों हुआ था जवाब सिर्फ एक ही है उस वक़्त की शिक्षा व्यवस्था यानि गुरुकुल। आज हम चर्चा करेंगे की क्यों आधुनिक शिक्षण व्यवस्था युवा को सक्षम बनाने में विफल रही है और इस बारे में भी चर्चा करेंगे की कैसे हम अपनी गुरुकुल की कई बातो को लागु कर के  इस विफलता को सुधार सकते है। आज भारत देश के पास कई समस्याए है ग़रीबी ,बेरोज़गारी , जिसको दूर करने के कई प्रयास हुए है और हो रहे है पर  क्या हम सफल हुए है ? भारत में हर  100 मे से 65 लोग युवा है वो जो देश को आगे बढ़ाने की शक्ति रखते  है पर फिर भी आज भारत देश इसका सदुपयोग नहीं कर पाया क्योंकी युवा तो है पर skilled नहीं है ऐसा नहीं है की पढ़े नहीं है पढ़े लिखे भी unskilled युवा भारत मे...