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योगवशिष्ट महारामायण




हमारी संस्कृति में कई सारे ग्रंथ लिखे गए है उनमें से ज्यादातर गीता, वेद और उपनिषद पढ़े जाते है, और वे है ही महत्व पूर्ण पर आज हम एक ऐसे शास्त्र के बारे बात करेंगे जिस के बारे में काफी कम लोग जानते है।

आपको किसी नही बोलेगा की  पूरी महाभारत पढ़ो पर ये जरूर कहा होगा की गीता पढ़ो क्यों? क्यों की सारा सर उसमे ही है, पूरी महाभारत पढ़ो न पढ़ो पर उसमे जो गीता कही हुई है उसमे उतनी ताकत है कि आपके विचारो को, आपके नजरीये को, आपके जीवन को बदल सकती है। अगर आप शास्त्रों को पढ़ोगे तो देखोगे की एक प्रश्नकर्ता हे जिसे उस विषय के बारे में जान ने की आतुरता है और एक उत्तर देनेवाला जो उस विषय के बारे में सब जानता है, गीता हो या उपनिषद सब में ऐसा ही है।

अगर में आपसे पूछूं की रामायण में ऐसा कोनसा हिस्सा है जिसमे एक इत्सुक प्रश्नकर्ता प्रश्न पूछता है और एक पुर्नज्ञानी उसका सचोट जवान देता है, एक ऐसा हिस्सा जो गीता के ही तरह ज्ञानदायक हो? वो हिस्सा है योगवशिष्ट महारामायण।जहां श्री राम प्रश्न पूछते है और वशिष्ठ जी जो की पूर्णज्ञानी और राम जी के गुरु है उत्तर देते है। 

रामजी की आयु लगभग १६ वर्ष की थी और अभी अभी उनका गुरुकुल का अभ्यास पूरा हुआ। अभ्यास पूरा होने के बाद राम जी और उनके भाई भारत घुमने की लिए जाते है और राम जी को वैराग्य आ जाता है, घूम के आने के बाद वो अपने कक्ष में बैठ के खुद से बहुत सारे प्रश्न किया करते थे , इसी दौरान ऋषि विश्वामित्र आते है और उनके यज्ञ में हो रहे राक्षसो द्वारा आक्रमण में राम सहायक हो ऐसी आज्ञा राजा दशरथ को देते है , जैसे की राजा को राम बहुत प्रेम करते है तो पहले इनकार करते है पर बाकि ऋषियों की मनाने पर मन जाते है, तभी बात आती है की राम जी जब से तीर्थ जा के आये  है  कुछ दिन तक अपने कक्ष से बहार ही नहीं निकले, तभी ऋषि वशिष्ठ जो के राम जी के गुरु है उनको पता चलता है की राम जी को वैराग्य प्राप्त हुआ है, तभी बाकि ऋषियों द्वारा विनती करने पर ऋषि वशिष्ठ जी जो राम जी के प्रश्न है उनके उतर देते है और यही है हमारा योग वशिष्ट महारामायण। 

ये ग्रन्थ में कुल ६ प्रकरण है 
१- वैराग्य प्रकरण 
२- मुमुक्ष प्रकरण 
३- उत्पति प्रकरण 
४- स्थिति प्रकरण 
५- उपसम प्रकरण 
६- निर्वाण प्रकरण 

इस ग्रन्थ कुछ विशेषताये है जो किसी और ग्रन्थ में नहीं देखी जाती चलो उसके बारे में बात करते है 

१. उत्तम प्रश्नकर्ता -

राम जी को अगर टीवी में देखो तो बिलकुल भोले दिखाए जाते है  पर उनकी जिज्ञासा ,उनकी चतुरता देखने हो तो ये ग्रन्थ बिलकुल आपको इस बात का ज्ञान देगा की राम जी की चतुराई कितनी थी।  पुरे ग्रन्थ में मेने ऐसा नहीं देखा की वशिष्ठ जी ने बोल दिया और राम जी ने बिना कोई प्रश्न किये मन लिया। ये बात आप ठीक से तब जानोगे जब ये ग्रन्थ पढ़ोगे क्यों की आज कल questioning mind को बहुत importance दिया जाता है। प्रश्न पूछना सरल हो सकता है पर राम जी जैसे तथ्य पर प्रश्न पूछते है सचमुच वाचक को आश्चर्य में डाल देते है। 

२. Critisism-

आज कल critisism को cool मना  जाता है मानना भी चाहिए पर critism सिर्फ  इंसानो को,या विचारो को न करते खुद ज़िंदगी और ज़िंदगी जीने के तरीको को critisis होते पहली बार देखा , राम जी  के तीर्थ जाने के बाद जो उनको वैराग्य होता है उसका वर्णन आप पढोगे तो देखोगे की राम जी ने कितना विचार किया इस संसार पर , उनका वैराग्य का जो वृतांत है उसमे आप इसे विचारो को देखोगे जो आपमें कही आया ही नहीं होगा। 

३. ब्रह्म सत्यं जगन्मिथा 

इस महावाक्य को सुना ही होगा पर तर्कों से क्या कही पर इस वाक्य को साबित होते देखा है , श्री वशिष्ट जी इस वाकय को कितने सुंदर और सचोट उदाहरण से समजाते है वो वाकई पढ़ने लायक है। 

और भी बहुत सी बाते है जो हमें इस ग्रन्थ से जान ने को मिलती है जैसे की ये विश्व कैसे बना, सीधा ऐसा जवाब नहीं की भगवान ने रचना की पर कैसे कैसे सारी चीज़ो का या तत्वों का निर्माण हुआ और ये विश्व कैसे व्याप्त है , मन क्या है , बुद्धि क्या है , आत्मा क्या है , ब्रह्म क्या है , अलग अलग ब्रह्माण्ड कैसे व्याप्त है , समय का चक्र कैसे चलता है , जैसी कई बाते ये ग्रन्थ हमें सिखाती है। हम ये सारी चीज़ो के बारे में चर्चा करेंगे पर अभी के लिए ये सिर्फ ये प्यारा सा introduction जिसे के आप को इस ग्रन्थ के बारे में थोड़ी जानकारी आये। 

चलिए मिलता हु next ब्लॉग में। 

जय श्री कृष्णा। 






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